Sunday, 19 February 2017

खुजली हुई छूट में

कोल्लागे मैं आर्ट्स २न्द इयर की स्तुदेंत हूँ, मैं कोल्लागे मैं बहुत फ्री टाइप की लड़की हूँ लड़कून के साथ मूवी देखना और घूमना मेरा सुक है
मैंने पहली बार जब सेक्स किती तो उस वक्त मैं २० साल की थी मेरी सहेली है अंजुम मैं उसके घेर जाते रहती हूँ और उसका भाई है वासिम, वो मेरे पीछे काफी दिनों से लगा हुआ था, वैसे भी मिजति खुजली होती रहती थी, मेरी उस से दोस्ती हूँ गई वो मुझे घुमाने ले जाता था
और मुझे मूवी दिखता था
एक दिन मैं उसके घेर गई तो घेर मैं कोई नही ता सिर्फ़ वासिम ही था पहले तो मुझे तोडा सा देर लगा फ़िर मैं अंदर गई और बातें करने लगी वासिम मुझे बोला किरी मैं तुम्हे किस करना छठा हूँ , मैं हूँ कहा केर आखें नीचे केर ली फ़िर वो आया और मेरे होथूं पैर अपना होठ रख दिया मुझे बहुत अच्छा लग रहा था मैं भी उस से लिपटती चली गई
थोडी देर बाद ही उसके हाथ मेरे बूब्स पैर आगये और वो मसलने लगा मेरे बदन मैं गर्मी आगे और मैं उस से पागलूं की तरह लिपट गई फ़िर वो मेरे सलवार को खोलने लगा मैं साथ देने लगी अनंत मैं मैं सिर्फ़ ब्रा पैंटी मैं रहा गई वो मुझे ऊठा केर सोफे पैर बिठाया और मेरे छुट मैं उंगली से सहलाने लगा फ़िर वो बोला की आज तुम्हे वो मजा दूँगा की तुम डेली केर्वाऊ गी मैं बिली अच्छा फ़िर वो मेरी पैंटी उतारी और ब्रा उतरा फ़िर मेरे चुचिओं ko mu main lay ker चूसने लगा मेरे निप्पल कडे हो गए और मेरी छुट मैं गीलापन आगया फ़िर वो मेरे हाथ मैं अपना ल*** डे दिया उसका ल*** मोटा और लंबा था मैं पूची की काया इतना बड़ा अंदर जा सकेगा वो बोला जाएगा तभी तो मजा आए गा
और फ़िर वो मेरी छुट सहलाने लगा मैं उसके ल*** से खेलने लगी
वो मुझे उत केर बेद पैर ले गया और मुझे लिटा केर मेरे बदन पैर लेट गया इस वक्त हम दोनों नंगे थे और उसका ल*** मेरे पेट पैर था जो की गरम और कदा था
फ़िर वो मुझे तनगून को फैलाने को बोला मैं टांगें फैलाये तो वो मेरे छुट की दरार पैर अपना ल*** रख केर अंदर दबाया पैर ल*** स्लिप केर गया और फ़िर वो दोबारा लगाया और दबाया मेरे मून से चीख निकल गई क्यू की मेरी छुट फटती हुई महसूस हो रही थी
धेरे धीरे उसने अपना पूरा ल*** मेरी छुट मैं दल दिया और मेरे उपर लेट गया मैं अपनी सांसें संभल रही थी मुझे से पुछा किरी कैसा लगा मैं बोली बहुत दर्द हो रहा है वो बोला ये तो पहली बार है अगली बार नही होगा
फ़िर वो अपना ल*** निकल केर फ़िर दबाया
इसी तराह से मुझे चोदने लगा मुझे आचा लगरहा था और मैं भी कमर उठा केर चुदवा रही थी मेरी छुट दो बार पानी छोड़ चुकी थी और मैं तीसरी बार के लिए तैयार थी की वो बोला डार्लिंग मेरा ल*** अब निकालने वाला है मैं बोली निकालू जल्दी फ़िर उसके ल*** ने फव्वरा चोदा मेरी छुट मैं और मेरे उपर वो गिर गया फ़िर करीब १० मिनुत बाद हुदोनो अलग हुए और मैं खुस थी की मैं चुदवा ली अब मुझे टेस्ट मिल गया था और मैं फ़िर कपडे पहन केर घेर वापस आगे.
उस दिन के बाद से मैंन चुदवाने लगी जो की मुझे बहुत अच्छा लगने लगा
कभी कभी मुझे चुदवाने का मौका नही मिलता था एक रत मैं अपनी सिस्टर के साथ सोई थी तो रत मैं पता नही कैसे उसके छुट पैर मेरा हाथ गया म,अं गरम तो थी ह और फ़िर उसे भी अच्छा लगने लगा मैं काफी देर तक उसके छुट से खेलती रही अपनी छुट उस्स्सकी जन्घून मैं घिसती रही फ़िर धेरे धेरे उसे भी मजा आनय लगा
और हम दोनों ने पहला लेस. सेक्स किया मेरी सिस का नम है सुमन, और वो मुझ से १ साल की बड़ी है उसके साथ लेस. सेक्स के बाद मैं उस से फ्री होकर बात केर ने लगी और वो मुझे अपनी सभी बातें बतानाया लगी
सुमन- तुम कभी चुदवाई भी है या नही?
किरण- दीदी मैं वासिम से कई बार चुद्वई हूँ पैर वो कभी कभी हो पता हैऔर मुझे ल*** की बहुत भूख रहती है अब तू बताऊ काया करून?
सुमन- अरे पगली इसमें काया है मेरे साथ रहेगी तो रोज ल*** मिलेगा और कोई दुर्र भी नही रहगा क्यू की मैं एक दावा लेती हूँ जो की मुझे मेरे एक दोस्त ने दिया है इसमें और भी फायेदा है मेरे साथ चलना मैं दिकहूंगी
किरण- ओके दीदी यू अरे सो डार्लिंग
फ़िर मैं दुसरे दिन सुमन के साथ बाहेर गई और उसके दोस्तों से मिली उसके बहुत सारे दोस्त थे सभी से वो मुझे अपनी चिति बाहें के रूप मैं ही मिली और बोली की आज से ये भी अपने ग्रुप मैं सामी हो गई है
और मैं उन लोगून के साथ घुमने फिरने और मजे करने लगी पैर जब असली चुदाई हुई तो उस समय मेरे सामने सुमन और उसके ४ दोस्त थे जिन्होने पहली बार मेर्री छुट की आग को पूरी तरह से ठंडा केर दिया और मैं फ़िर तो उस ग्रुप की दीवानी हो गई कैसे काया हुआ ये मैं अगली कहानी मैं लिखूं गी.

Tuesday, 14 February 2017

कमबख्त प्यासी भूमि महिला

कमबख्त प्यासी भूमि महिला मेरे मकान मलिक की बीवी करीब 40 साल की थी और एक लड़की थी जो करीब बीस साल की थी, नाम था भावना। Free Hindi Gandi Kahani दिखने में दोनों माँ और बेटी ग़ज़ब की थी। मकान मालकिन की फ़ीगर 38-30-40 के लगभग होगा। उसका भरा हुआ बदन देख कर मेरे लण्ड में आग सी लग जाती थी। बिल्कुल चिकनी औरत थी वो ! मकान मालिक सरकारी नौकरी में था और शाम को देर से आता था। देखने में वह अधेड़ उम्र का लगता था जैसे बिल्कुल झड़ गया हो।
क्योंकि मेरी नौकरी ऐसी थी कि मुझे सवेरे जाना पड़ता था और शाम को आता था इसलिए मैं उन लोगों से ज़्यादा बात नहीं करता था, कभी कभार ही हेलो होती थी। गुजराती थे इसलिए घर में शराब और सामिष खाना और लाना मना था। इसलिए मैं भी इन बातों पर बहुत ध्यान रखता था, कभी अगर बीयर पीने का मन होता था तो बाहर से ही पीकर आता था।
धीरे धीरे मकान मालकिन से कभी कभार मुलाकात हो जाती थी। उसकी बेटी क्योंकि कॉलेज में पढ़ती थी इसलिए शाम को घर पर वो अकेली हो होती थी।
एक शाम को मैं थोड़ा जल्दी आ गया घर पर और नीचे ही मकान मालकिन ने मुझे चाय पर निमंत्रण दिया। मैंने पहले तो ना कर दी लेकिन फिर उसके आग्रह करने पर मैं चाय के लिए हाँ कर दी। मैं अपने कमरे में गया और अपने कपड़े बदल कर आ गया। मैंने एक टी-शर्ट और बरमुडा पहन रखा था। मकान मालिकन ने मेरे घण्टी बजाने पर दरवाज़ा खोला तो मैं उसको देख कर दंग रह गया। उसने एक बहुत ही पतला सा गाऊन पहन रखा था जिसमें से उसकी चड्डी साफ साफ दिखाई दे रही थी।
मैंने उसे कहा- भाभी जी ! आज तो बहुत गर्मी है !
और पंखा चला दिया। कमबख्त प्यासी भूमि महिला
मकान मालकिन ने कहा- हाँ, आज गर्मी तो बहुत है इसलिए मैंने भी यह नया गाऊन पहन ही लिया !
मैंने कहा- यह गाऊन तो बहुत ही अच्छा है !
यह बात सुन कर वो खुश हो गई और बोली- अब मैं चाय बनाती हूँ आपके लिए !
और इतना बोलकर वो रसोई में चली गई। मैंने उसे रसोई में जाते देखा तो दंग रह गया। उसने गाउन के नीचे कोई ब्रा भी नहीं पहन रखी थी। मैंने सोचा शायद गर्मी ज़यादा है इसलिए पतला सा गाऊन पहना होगा।
पर अपने लण्ड का क्या करता? वो तो लोहे से भी ज़्यादा सख़्त हो गया था। मैंने सोचा कि आज कुछ बात आगे बढ़ा ली जाए।
कमबख्त प्यासी भूमि महिला
खैर भाभी जी चाय लेकर आ गई और हम दोनों ने बातें शुरू कर दी।
भाभी जी ने पूछा- आपने अभी तक शादी क्यों नहीं की ?
मैंने कहा- भाभी जी, पहले मैं ज़िंदगी में कुछ बन जाऊं फिर शादी करूँगा। फिलहाल तो मैं अपने करियर पर ध्यान दे रहा हूँ।
भाभी जी बोली- यह पैसे कमाने के चक्कर में कहीं तुम्हारी उमर ना ढल जाय! फिर कोई लड़की भी नहीं मिलेगी।
मैंने बोला- भाभी जी, यह तो मेरी किस्मत है, अगर कोई लड़की नहीं मिलती तो कोई बात नहीं !
भाभी जी बोली- नहीं, अभी तुम्हारी उमर ज़्यादा नहीं है और फिर शरीर की ज़रूरत का भी तो तुम्हें ही ख्याल रखना है ! कमबख्त प्यासी भूमि महिला
यह सुनकर मैं बहुत खुश हुआ और बोला- भाभी जी, शरीर की ज़रूरत का तो मैं खुद ही कोशिश करता हूँ पूरी करने के लिए !
भाभी जी बोली- देखो, यह जो तुम बात कर रहे हो, उससे तुम्हारा शरीर कमज़ोर हो जाएगा और फिर शादी के बाद कुछ नहीं कर सकोगे।
भाभी जी की बात सुनकर मैं चौंक गया और मैंने सोचा कि लोहा गरम है, लगता है कि आज काम बन ही जाएगा।
मैंने बोला- भाभी जी, फिर आप ही बताइए कि मैं क्या करूँ ? फिलहाल तो मैं अपने हाथ से ही काम चला लेता हूँ।
भाभी जी बोली- क्यों तुम्हारी कोई गर्लफ्रेंड नहीं है क्या? उससे कुछ करते हो?
मैंने बोला- भाभी जी, इतना समय नहीं है कि कोई गर्लफ्रेंड बनाई जाय और फिर मैं फिलहाल अपने करियर की तरफ़ ध्यान दे रहा हूँ।
भाभी जी बोली- चलो कोई बात नहीं, तुम कभी कभार अपने दिल की बात तो मुझसे कर लिया करो। इससे तुम्हारा मन भी हल्का हो जाएगा और तुम्हारा ध्यान भी बंट जाएगा।
फिर मैंने पूछा- भाभी जी और सुनाएं ! भैया तो बहुत ही काम करते हैं ! दिन रात सिर्फ़ पैसे कमाने की कोशिश करते रहते हैं, वो तो आपका बहुत ही ख्याल रखते हैं। कमबख्त प्यासी भूमि महिला
यह सुनकर भाभी जी बोली- अब क्या बताऊं तुमको ! जब से भावना हुई है, वो तो कुछ करते ही नहीं है। बस मैं भी तुम्हारी तरह ही हूँ, सब कुछ होते हुए भी कुछ नहीं है मेरे पास, बस अधूरी सी बनकर रह गई हूँ। इन पैसो का क्या करूँगी जब मेरा कोई ख्याल ही नहीं रखता।
मैंने हिम्मत कर के बोला- भाभी जी, हम लोग ऐसा क्यों नहीं करते कि एक दूसरे का ध्यान रखें, मेरा मतलब हम लोग दोस्त भी तो बन सकते हैं ना?
भाभी जी बोली- अच्छा, अब दोस्त भी बोलते हो और भाभी भी कहते हो? सबसे पहले तुम मुझे गौरी कह कर बुलाओ ! इतनी औपचारिकता में पड़ने की ज़रूरत नहीं है।मैंने कहा- अच्छा गौरी, चलो अब से हम दोस्त हो गये हैं।
यह कह कर मैंने गौरी का हाथ पकड़ लिया और उसे प्यार से दबा दिया। गौरी मेरी इस हरकत से गरम सी हो रही थी।
मैंने कहा- गौरी, तुम बहुत सुंदर हो और मैं तो तुम्हारी वजह से ही इस घर में रहता हूँ, नहीं तो मैं अपने ऑफ़िस के पास भी रह सकता था। इतने दिनों से बस अपने दिल की बात दिल में रख कर घूम रहा था। बहुत दिल करता था कि आपसे आ कर दोस्ती की बात करूँ लेकिन कभी हिम्मत ही नहीं होती थी। मेरी नज़र में गौरी तुम बहुत ही खूबसूरत और सेक्सी औरत हो और मैं हमेशा तुम्हारे पति को बहुत ही खुशनसीब समझता हूँ जिसे तुम्हारे जैसे औरत मिली है।
गौरी यह सब सुनकर बहुत खुश हुई और बोली- अच्छा अब उनके आने का समय हो गया है, तुम चाय ख़त्म करो और ऊपर अपने कमरे में जाओ। मैं तुमसे कल बात करूँगी।
अगली सुबह लगभग साढ़े पाँच बजे मेरे दरवाजे की घंटी बजी और मैंने दरवाज़ा खोला तो देखा कि गौरी बाहर खड़ी है। वो मुझे अर्धनगन अवस्था में देख कर मुस्कुरा कर गुड मॉर्निंग बोलकर छत पर चली गई। मुझे कुछ समझ नहीं आया और जब वो नीचे जा रही थी तो उसे मैंने अपने कमरे में खींच लिया।

Friday, 10 February 2017

मी गे असा झालो

लहानपणी मी जिथे केस कापायला जायचो तिथला नाव्ही माझी नुनु हाताने हलवायचा
मला खूप मजा येयची .. मी दुपारी शाळेतून आल्यावर त्याकडे जाऊ लागलो , त्याच्या दुकानातच बसून असायचो .. असेच तीन चार वर्ष चालू राहिले ....
असेच एकदा मी केस कापून झाल्या नंतर त्याने माझी चड्डी काढली आणि नेहमी प्रमाणे माजी नुनु चोळू लागला... दुकानात दुपारी कोणी नसायचे , ह्या वेळी मी नुसता बसून नाही राहिलो . . मी त्याचा बुल्ला पकडला आणि दाबून बघू लागलो .... त्याचा बुल्ला ताठू लागला , त्याने मग दुकान बंद करून मला मागच्या खोलीत उचलून नेले ... तिथे त्याने मला नागडे केले आणि स्वतः पण नागडा झाला... तो दिसायला सावळा होता, त्याची छाती खूप केसाळ होती , बुल्ल्या भोवती पण खूप केस , त्याचा काळा कडक बुल्ला मस्त लांब होता ...
त्या रूम मध्ये गादि होती ,,, त्यावर त्याने मला झोपवले आणि म्हणाला आज खूप दिवसांनी इच्छा पूर्ण होतीय . त्याने मला झोपवले अनु माझ्या वर चढला... त्याचा बुल्ला माझ्या बुल्ल्या वर चोळू लागला...
मला किस करू लागला सगळी कडे, मग त्याने मला त्याच्या बुल्ल्याशी खेळायला सांगितले ... मी पण मस्तीने खेळू लागलो , मला मजा येत होती पण काही कळत नवते , मी त्याचा बुल्ला हलवू लागलो , वाकवू लागलो ,, खाली वर करु लागलो , मग त्याने मला सांगितले के मुठीत धरून खालीवर कर ... मग मी तसे करू लागलो ....
तो म्हणाला कि आता तोंडात घे बुल्ला ... मग मी चोखू लागलो ... खूप वेळ चोखला ..मग 69मध्ये आलो आणि त्याने माझा पण तोंडात घेतला... मला खूप मस्त वाटले .... खूप वेळाने त्याने चीक सोडला ...
मग आम्ही आवरून निघालो ...
तेवा पासून मला सवय झाली

Monday, 6 February 2017

पड़ोसन विधवा भाभी- Sexy Stories in hindi

हमारे पड़ोस में एक भाभी रहती है, भाईसाहब की मृत्यु कोई चार वर्ष पहले हो गई थी। भाभी की उम्र कोई 45 के आस पास होगी, लेकिन फिगर अच्छा मेंटेन कर रखा था, इस उम्र में भी उन्हें कोई 35-36 से ज्यादा का नहीं कह सकता।
उनका लड़का एक लड़की को लेकर भाग गया, छोटी लड़की की अभी पिछले वर्ष ही शादी कर दी है। लड़की की शादी के बाद भाभी जी हर महीने गोवर्धन परिक्रमा लगाने के लिए जाती थी, उनके साथ मैं भी जाता था। वहीं का किस्सा मैं सुनाने जा रहा हूँ।
हर महीने की तरह जनवरी में हम लोग गोवर्धन के लिए निकले। भाभी को अगले दिन कहीं जाना था, सो उन्होंने कहा- आज जल्दी चलते हैं ताकि शाम के समय ही परिक्रमा पूरी कर लें और सुबह पहली बस पकड़ कर वापिस आ जायेंगे।
मैंने कहा- ठीक है !
हम लोग दोपहर की गाड़ी से निकल लिए। मथुरा पहुँच कर द्वारिकाधीश के दर्शन किये और वहाँ से टेंपो पकड़ कर गोवर्धन शाम को 6 बजे पहुँच गए। जिस धर्मशाला में हम रुकते थे, वहां सामान रखकर हम लोग परिक्रमा के लिए निकल गए। वापसी में बहुत तेज बारिश होने लगी। बचते-बचाते हम लोग धर्मशाला पहुंचे तो रात के 11 बज रहे थे और हम लोग पूरी तरह भीग चुके थे।
धर्मशाला पहुँच कर मैंने भाभी से कहा- आप अन्दर चलकर कपड़े बदल लो, फिर मैं बदल लूँगा।
भाभी अन्दर चली गई, कुछ देर बाद वो बोली- कपड़े तो हम एक ही जोड़ी लाये हैं, अगर बदल लिए तो सुबह पूजा के लिए क्या पहना जायेगा?
मैंने भाभी से कहा- आप मेरे कपड़ो में से लुंगी लेकर लपेट लो और रजाई में लेट जाओ। मैं देखता हूँ मेरा क्या होगा।
भाभी ने कहा- अच्छा !
और उन्होंने किवाड़ बंद कर लिए।
मैंने तौलिए से शरीर पोंछा और गरम चादर ओढ़ ली। मैंने दरवाजा खटखटाया और पूछा- मैं अन्दर आ जाऊँ?
तो उन्होंने कहा- हाँ !
एक तो ठण्ड, ऊपर से बारिश ! दांत कटकटा रहे थे। कमरे में देखा एक ही गद्दा रजाई थे। मैंने धर्मशाला वाले से पूछा तो उसने कहा- एक कमरे में एक ही गद्दा-रजाई मिलेगा।
मैं वापस आ गया। मैंने भाभी से कहा- आप सो जाओ ! मैं ऐसे ही सो जाऊंगा।
भाभी तो सो गई, कुछ देर तो मैं लेटा रहा पर ठण्ड थी कि वो हटने का नाम नहीं ले रही थी, मेरे दांत बजने लगे, तभी भाभी बोली- संजू तुम भी इसी रजाई में ही लेट जाओ ! ठण्ड बहुत है, नहीं तो तुम्हारी तबीयत ख़राब हो जायेगी।
पहले तो मैं झिझका क्योंकि मुझे पता था कि भाभी अन्दर नंगी लेटी हैं, पर मरता क्या न करता मैं उसी रजाई में एक साइड से घुस गया।
भाभी और मैं एक दूसरे की तरफ पीठ करके लेट गए। शरीर में थोड़ी सी गर्मी आई, पर ठण्ड अभी लग रही थी। मैंने करवट बदली और भाभी की पीठ की तरफ मुँह करके लेट गया। शायद मेरे ठंडे हाथ उनकी पीठ पर लगे होंगे, बोली- ला अपना हाथ दे !
कहकर मेरा हाथ अपने पेट पर रख लिया। भाभी के शरीर का गरम-गरम स्पर्श पाकर मेरे मन का शैतान जाग उठा। अगर आज भाभी की चुदाई करने का मौका मिल जाये तो मजा आ जाये।
पर मैंने कभी उन्हें इस नज़र से कभी देखा नहीं था इसीलिए शांत लेटा रहा, पर मेरा हथियार तैयार हो गया और उनके पिछवाड़े से टकराने लगा। मैं थोड़ा सा नीचे को सरक गया जिससे कि सही जगह लग सके।
वही हुआ, जैसे ही मैं नीचे को सरका, मेरा लंड उनकी गांड की दरार के बीच में जा टिका। पहले तो वो जरा कसमसाई पर फिर चुपचाप लेट गई। मैं भी बिलकुल चुप लेटा रहा। थोड़ी देर में मैंने महसूस किया कि उन्होंने अपनी टांग उठाई और लंड को बीच में दबाकर लेट गई। अब मेरी हिम्मत थोड़ी सी बढ़ी, मैंने अपना हाथ जो उनके पेट पर था, सरका कर उनकी बड़ी-बड़ी चूचियों पर रख दिया और उन्हें सहलाने लगा।
यह सब काम बिल्कुल चुपचाप हो रहा था। धीरे धीरे साँसें गरम होने लगी, वो मेरा हाथ पकड़ कर चूचियों को सहलाने में मेरा सहयोग करने लगी। एकाएक वो उठी और मेरे लंड को अपने मुँह में लेकर चूसने लगी। मैंने भी धीरे से उनकी टांगें चौड़ी कर चूत को चाटना शुरू कर दिया। हम लोग 69 के पोज में थे। उन्होंने अपनी चूत को बिलकुल साफ़ कर रखा था।
उनके चूसने में इतनी गर्माहट थी कि मुझे लगा कि मैं अभी झड़ जाऊँगा।
तभी भाभी ने लंड को चूसना छोड़ दिया और बोली- संजू, मुझे आज कसके चोद दो ! बहुत प्यासी हूँ ! जबसे तुम्हारे भैया गए हैं तब से आज लंड का रसपान किया है।
मैं तो तैयार था, झट से उन्हें सीधा लिटाया और अपना लंड उनकी मलाईदार चूत पर टिका दिया। चाटने की वजह से चूत रस से भरी हुई थी। एक ही झटके में मेरा लंड चूत की गहराइयों में जा टिका। उनके मुंह से सिसकारी निकली, मैंने पूछा- दर्द हुआ क्या ?
वो बोली- हाँ, इतने दिनों बाद जो करवा रही हूँ ! पर तू रुक मत, शुरू हो जा ! आज मेरी प्यास बुझा दे !
मैं जोश में आ गया और जोर से धक्के लगाने लगा। वो भी अपनी कमर हिला कर मेरा साथ देने लगी। 8-10 धक्कों के बाद ही उन्होंने मुझे कस कर पकड़ लिया और बोली- मैं तो गई !
और वो झड़ गई पर मेरा तो अभी हुआ नहीं था। वो समझ गई और बोली- बाहर मत निकलना ! अन्दर डाले हुए ही लेटे रहो !
मैं उनकी चूत में ही लंड डाले लेटा रहा और उनकी चूचियों को चूसने लगा। कुछ ही देर में वो दोबारा तैयार हो गई। इस बार दोनों पूरे जोश में थे।
करीब 20-25 धक्कों के बाद मैं झड़ने लगा तो मैंने कहा- लो भाभी, संभालो ! मैं गया !
तो बोली- अन्दर मत झाड़ना ! मेरे मुंह में झाड़ना !
मैंने लंड चूत में से निकाल कर उनके मुंह में डाल दिया। वो सारा रस पी गई और जीभ से चाट चाट कर मेरे लंड को साफ़ कर दिया। फिर हम ऐसे ही सो गए। सुबह चार बजे उठकर एक दिहाड़ी और लगाई उसके बाद नहा धो कर पूजा करने चले गए। वहाँ से वृन्दावन आए, वहां पर दर्शन करने के बाद मैंने भाभी से कहा- अब बस पकड़कर दिल्ली चलते हैं।
तो भाभी बोली- नहीं, अभी यहीं एक धर्मशाला में किराये पर कमरा ले लेते हैं, शाम को चलेंगे !
दोस्तो, उस दिन मैंने उन्हें तीन-चार बार चोदा। उसके बाद हम रात को दिल्ली आ गए। अब जब कभी हम वहाँ जाते हैं तो एक बार तो जरूर चुदाई का प्रोग्राम बनता है।

Saturday, 4 February 2017

पारिवारिक सम्भोग

मेरा नाम "अरमान सिंह" है |मेरी उम्र २२ साल है | मै दिल्ली का रहने वाला
हूँ , परन्तु अपनी इंजीनियरिंग करने के बाद एक एम् एन सी में जॉब करने के
लिए बंगलोर शिफ्ट होना पड़ा | १ साल के बाद मेरा प्रोमोशन हो गया और मै
इंडिया चीफ ओपरेशन अधिकारी बन गया | मेरे बॉस जो की शिकागो में रहते है
उन्होंने मेरे काम से खुश होकर मुझे १ बड़ा सा विला , दो गाड़ियाँ ( १
निसान और १ बी एम् डब्लू ) भेंट की थी | मेरी ज़िन्दगी अछे से चल रही थी
|
मै आपको अपने परिवार के बारे में बताना ही भूल गया | मेरी माँ जिनका नाम
रीता सिंह , उम्र ४० साल है | चूंकि मेरी माँ खुद एक डॉक्टर हैं तो उनकी
शारीरिक बनावट काफी मनमोहक है | वो दिल्ली में एक बहुत बड़ी लेडी डॉक्टर
थीं पर मेरी जॉब लगने के बाद उन्होंने हॉस्पिटल जाना बंद कर दिया था और
जिम में खुद को फिट रखती थीं |
उन्हें देखकर कोई ये नहीं कह सकता था की वो ४० की है बल्कि लोग पार्टी
में हम दोनों को प्रेमी प्रेमिका समझ लेते थे तब मै झेंप जाया करता था |
मेरी दो बहनें स्तुति - २० साल और अनामिका १८ साल | स्तुति ने अभी कॉलेज
ख़तम किया और उसे मोडेलिंग का बहुत शौक था | वो भी बहुत सुन्दर थी | और
दूसरी छोटी बाहें अनामिका ने १२ वीं पास करके फोटोग्राफर बन्ने के लिए
कोर्स शुरू किया था |
मेरे पिता जी का देहांत जब मै १७ साल का था तभी हो चुका था | वो एक बहुत
बड़े व्यवसायी थे |
मेरी माँ और दोनों बहने दिल्ली में रहती थी और मै अकेला बंगलोर में | कुछ
दिनों के बाद मेरी बाहें स्तुति का फोने आया और कहने लगी की मुझे बंगलोर
घूमना है भैय्या | तो मैंने माँ से इजाज़त लेकर उसे फ्लाईट से बंगलोर बुला
लिया | काम के कारण इतने व्यस्त होने के कारण मै माँ और बहनों से १ साल
तक मिल नहीं पाया था | आज जब मै अपनी बाहें को लेने एअरपोर्ट गया -
मै सीधे ऑफिस से लेने गया था , थोड़ा काम होने की वजह से लेट हो गया था |
मैंने एअरपोर्ट पहुच कर उसे कॉल किया और वो गुस्सा होकर बिही थी | मै उसे
देखता ही रह गया | उसने एक शोर्ट्स काली रंग की और एक सफ़ेद टी शर्ट पहेन
रखी थी | मुझे देखते ही उसका गुस्सा दूर हो गया और वो आकर मुझे झट से गले
लगा के मेरे गालों पे किस करते हुए बोली - "भैय्या आप नहीं सुधरेंगे
|आपकी लेट होने की आदत पता नहीं कब जायेगी |" मैंने कहा -"सॉरी छुटकी ,
आज काम बहुत था ऑफिस में| चल चलते हिं घर , तुझे अपना नया घर भी दिखाना
है |" वो बोली - "ज़रूर भैय्या |"
मै सीधा गाडी से उसे लेकर घर पंहुचा | उसने मेरा घर देखकर कहा - " वाव
भैय्या | मस्त घर लिया है |" अन्दर आकर मैंने उसे फ्रेश होने के लिए कहा
और उसका सामान अपने बगल वाले रूम में रख दिया | मैंने अभी तक कोई नौकर
नहीं रखा था | वो बहार गयी और स्वीमिंग पूल देखते ही खुश होकर बोली
भैय्या मै नहा लूँ, तो मैंने कहा अभी नहीं कल |क्योंकि हमें खाने बहार
जाना था | फिर जल्दी से तैयार होकर हम बहार खाना खाने निकले | एक अच्छे
पब में जाकर हमने थोड़ी बहुत ड्रिंक की और डिनर करके ११ बजे रात तक घर आ
गए | मैंने ऑफिस से १२ दिन की छुट्टी ले रखी थी तो कोई परेशानी नहीं थी
की कल ऑफिस भी जाना है |
घर आते ही मैंने उससे कहा की अब सो जा बहेना , कल सुबह घूमने चलना है |
उसने कहा नहीं भैय्या मुझे तो नीद नहीं आ रही आपको आ रही हो तो सो जाओ|
मै तो स्वीमिंग पूल में नहा के सो जाउंगी| मैंने कहा अच्छा चल ठीक है मै
भी तेरे साथ बैठ जाता हूँ , ढेर साड़ी बातें करनी है | उसने कहा थैंक्स
भैय्या मै चेंज करके आती हूँ | मैंने कहा हाँ मै भी चेंज कर लूं | मै
अपने रूम में गया और अपने शोर्ट्स और १ हाफ टी शर्ट पहेन के बहार अपने
मिनी बार से एक व्हिस्की का पेग बना के स्वीमिंग पूल के किनारे पानी में
पैर दाल के बैठ गया | कुछ देर बाद स्तुति अपने कमरे से आई - मै तो उसे
देखता रह गया | उसने एक काली बिकिनी पहेन रखी थी | ब्रा विथ स्ट्रिप्स
एंड पैंटी विथ स्ट्रिप | पैंटी उसकी थोंग थी | मै उसे देखकर हैरान रह गया
| उसने मुझे जैसे जागते हुए पुछा क्या देख रहे हो भाई | मैंने कहा नही
कुछ नहीं तुम बहुत सुन्दर हो | उसने हंस के पूल में छलांग लगा दी , मेरे
कपडे भी भीग गए थे | फिर वो स्विम कर रही थी | हमने बातें शुरू की | उसने
मुझे बीच में कहा भैय्या आप अकेले अकेले पि रहे हो | मुझे भी पीना है |
मै उठा और उसके लिए उसकी पसंदीदा वोदका का पेग बना लाया | अब हम दोनों
भाई बाहें आपस में बातें कर रहे थे और दारु भी पिटे जा रहे थे | कुछ देर
बार उसने मुझे भी पानी में खीच लिया |
अब हम दोनों को थोड़ा थोड़ा सुरूर दारु का छाने लगा था | अब हम दोनों आपस
में कुछ अश्लील बातें भी करने लगे थे जैसे तू बहुत हॉट है | तेरे बूब्स
बहुत अच्छे हैं | वो शर्मा के बस हाँ या ना कह रही थी | मैंने उसे एक बार
में अपने पास खीचा और उसके लिप्स पे किस कर दिया | वो कुछ नहीं बोली | अब
मैंने कहा रात बहुत हो गयी है चलो अन्दर चलते हैं नहीं तो तुम्हारी तबियत
ख़राब हो जायेगी |
फिर वो उठ कर बाथरूम में चली गई नहाने. पर नहाने के बीच में उसने कहा
भैय्या मैंने नाईटी नहीं ली है तो दूसरा तौलिया दे दीजिये.
बाथरूम में शटर लगा हुआ था शावर केबिन में और कोई लाक नहीं था। बस अलग
अलग केबिन थे, इसलिए मै अन्दर आ गया । मैंने शटर ज़रा सा सरका कर तौलिया
दे दिया ।
आगे की कहानी मेरी बहेन स्तुति के मुह से -
मैंने ध्यान नहीं दिया पर शायद वो भी तौलिया लपेटे थे क्योंकि उन्होंने
भी नहाना था। वो शीशे के सामने अपना चेहरा धोने लगे। मैं शटर से जैसे ही
बाहर निकली और वो जैसे ही मुड़े तो हम दोनों टकरा गए और मेरा तौलिया खुल
गया। मैं घबरा गई और तुरन्त अपने दोनों हाथ अपने स्तनों पर रख लिए
क्योंकि अब मैं पूरी तरह से नंगी थी। मेरा योनि-क्षेत्र पूरी तरह से बाल-
रहित किया हुआ था। भैया ने मुझ पर ऊपर से नीचे तक नज़र डाली, उनके तौलिये
के अन्दर भी कुछ उभार सा आ रहा था, पर उस वक्त मैं समझ नहीं पाई. मेरी
आंखों में आँसू थे। भैया ने तुरन्त तौलिया उठाया। यह सब इतनी जल्दी हुआ
कि कुछ समझने क मौका ही नहीं मिला। मैं भी सन्न चुपचाप सर झुकाए खड़ी थी।
भैया ने तौलिया मेरे कन्धे पर डाला और मुझे अपनी बाहों में भर लिया और
मैं भी उनसे चिपक गई। मैंने यह भी ध्यान नहीं दिया कि मैं अभी भी नंगी
हूँ। मेरे बूब्स उनके सीने से चिपके हुए थे। उनका भी शायद तौलिया खुल
चुका था और उनका औज़ार यानि लिंग करीब ८-९" लम्बा और २" मोटा मेरी कुँवारी
योनि पर टिका हुआ था। पर उस वक्त मेरा इन सब बातों पर ध्यान ही नहीं गया।
भैया मुझे चुप कराते हुए बोले।" अरे पगली सिर्फ़ मैं ही तो हूँ ! क्या
हुआ?" ये कहते कहते उन्होंने मुझे अपनी बाहों में उठा लिया और कमरे में
ले गये और बिजली बंद करके मद्धम रोशनी कर दी ताकि मेरी शर्म दूर हो जाए।
ये सब ३-४ मिनट में हो गया था। उन्होंने मुझे दीवार से सटा दिया और मेरे
माथे को किस किया और कहा- चिन्ता मत करो। मैंने उन्हें चिपका लिया और
उन्होंने मुझे। उनका लम्बा मोटा लिंग मेरी कुँवारी योनि पर रगड़ खा रहा था
पर इस बात पर काफ़ी देर बाद मेरा ध्यान गया।
भैया ने मेरे चेहरे को अपने हाथों में के कर होठों को किस किया तो मेरे
शरीर में बिजली सी दौड़ गई। मैंने कहा- भैया! यह सब ठीक नहीं है। मैं यह
कहना चाहती थी कि भैया मुझे होठों पर किस करने लगे । फ़िर रुक कर मेरे
बालों को हटा कर मेरी गरदन पर किस किया तो मैं उनसे कस कर लिपट गई। वो
फ़िर मुझे बिस्तर पर ले गए और लिटा कर मेरे ऊपर लेट गए। हम दोनों के नंगे
बदन एक दूसरे से कस कर चिपके हुए थे और हम दोनों एक दूसरे को किस कर रहे
थे। वो मेरे होठों को और मेरी जीभ को चूस रहे थे, मैं अपने होश खोती जा
रही थी।उनका लण्ड मेरी अनचुदी चूत पर रगड़ खा रहा था जिससे मैं पागल हुई
जा रही थी।
फ़िर भैया मेरी एक चूची को जोर से दबाने लगे और दूसरी के निप्पल को चूसने
लगे जिससे मैं और पगला गई। अचानक मैं ज़रा होश में आई तो कहा- भैया ये सब
ठीक नहीं है, अगर किसी को पता चला तो मैं तो मर ही जाऊंगी। वो बोले- जान
! क्या तुम मुझे ज़रा भी नहीं चाहती ! मैं तुम्हारे लिए इतने दिनों से तड़प
रहा था और आज तुम्हें पूरी तरह से अपना बनाना चाहता हूँ।
मैंने कहा- भैया…ऽऽऽ… ! और मेरे आगे कुछ कहने से पहले उन्होंने अपने
होठों को मेरे होठों पर रखा, फ़िर कहा- आज से मैं भैया नहीं, तुम्हारा पति
और जान हूँ, अगर ज़रा भी तुम्हारे दिल में मेरे लिए कोई जगह है तो बोलो।
मैंने कहा- मैं आपको चाह्ती तो हूँ पर … !
मेरे आगे बोलने से पहले उन्होंने मेरे होठों पर उंगली रख दी और कहा- बस
हम आज से पति-पत्नी हैं और आज हमारी सुहागरात है।
मैंने कहा- लोग क्या कहेंगे?
उन्होंने कहा- मैं किसी की परवाह नहीं करता और अब हम तुम पति-पत्नी बन कर
एक दूसरे को सुखी रखेंगे ………. मैं तुम्हें प्यार करता हूँ जान !
मैंने कहा- मैं भी तुम्हें प्यार करती हूँ ……. भैया !
भैया कहते ही उन्होंने मुझे कहा- आज से मैं तुम्हारा भाई नहीं पति हूँ
और अब तुम मुझे कुछ और कहा करो!
मैंने कहा- क्या !
वो बोले- कुछ भी … जैसे जान या कुछ भी !
मैंने कहा- ठीक है भैया .. ओह सोरी … जान ……. आई लव यू !
हम दोनों बिस्तर पर एक दूसरे से कस के चिपके हुए थे। भैया ने फ़िर मुझे
किस किया और मेरी जांघों के बीच में आ गए। मैंने अपनी टांगें उनके पैरों
पर रख ली थी। उन्होंने अपने एक हाथ को मेरे सर के नीचे रख कर किस किया और
दूसरे से मेरी अनचुदी कुँवारी चूत में उँगली की तो मेरे मुंह से सिसकारी
सी निकली-आऽऽऽऽऽऽह !
भैया ने कहा- जान अपने पति के लण्ड को अपनी कुँवारी चूत पर रखना जरा !
मैंने कहा- क्या होगा जान …! कहते हुए उनके लण्ड को अपनी चूत पर रखा। हम
दोनों अब एक दूसरे का साथ देने लगे थे। भैया पहले धीरे धीरे मेरे अन्दर
अपना डालने लगे। मैं सिसकारी लेने लगी थी। एक इन्च जाते ही मुझे दर्द का
अनुभव हुआ तो मैंने कहा- आऽऽऽऽह्ह्ह …… अब बस … जान, अब बस भी करो, दर्द
हो रहा है …!
वो बोले- चिन्ता मत करो, आज सब कुछ होगा … दर्द, मज़ा और हमारी सुहागरात
…… आऽऽह ! कहते हुए उन्होंने एक झटका दिया कस के
आऽ…॥अऽऽऽऽअऽह्ह्हहहाऽआऽऽऽ। ऊईऽऽऽ माँ मर गई मैं ! प्लीज़ भैया अब निकाल लो
अब और दर्द नहीं सहा जा रहा है ! मैं रोते हुए बोली।
उन्होंने कहा- भैया बोलोगी ? यह कहते हुए एक और झटका मारा, लण्ड शायद ५"
अन्दर जा चुका था। मैंने कहा- सोरी जान ……. लेकिन बहुत दर्द हो रहा है !
वो बोले- जान चिन्ता मत कर, थोड़ी देर में सब सही हो जाएगा। वो फ़िर मेरे
बूब्स चूसने लगे। थोड़ी देर में मुझे कुछ आराम मिला तो उन्होंने फ़िर ३-४
जोरदार झटके मारे तो मेरी हालत ही बिगड़ गई और चीख निकल गई- आऽऽऽऽऽऽऽऽऽह
……………… मर गई … … माँअऽऽऽऽऽ ……!
मेरी आंखों में आँसू थे। मैं उनसे चिपक गई और अपनी टांगों को उनकी कमर पर
जकड़ लिया। वो मुझे किस करने लगे और हम दोनों एक दूसरे के मुंह में जीभ
डाल कर चूमने लगे। थोड़ी देर में मैं सामान्य होने लगी। तब भैया ने मेरे
बूब्स को पकड़ा और अपने लण्ड को अन्दर बाहर करने लगे। मुझे तकलीफ़ हो रही
थी पर थोड़ा मज़ा भी था कुछ अलग तरह का- आऽऽऽऽह्ह्ह. ……. जान ……..
आऽऽऽऽऽह्ह्ह्हाअ …… आज पूरी तरह से अपनी बना लो जानऽऽऽ … आऽऽऽअऽऽऽह्ह
मैंने कहा तो भैया ने भी कहा- ओहऽऽ … जान …!. कमरे में हमारी आवाज़ें गूंज़
रही थी। मेरी सिसकारियाँ ज्यादा ही थी क्योंकि उनका ८ -९ इन्च लम्बा लण्ड
मुझसे झेला नहीं जा रहा था। ५ मिनट तक वो मुझे लगातार रौंदते रहे, फ़िर
मैं चीखी-जान आऽऽऽऽअऽऽआऽऽह्ह मुझे कुछ हो रहा है, पता नही क्या हो रहा
है, मज़ाऽऽ आ रहा है आऽअ॥अऽ॥आऽऽऽह !
"ओऽऽह जान तू चरम पर है और मै भी ऽऽऽ जान ! मैं गया ऽऽ मेरा झड़ रहा है अआ
…….." उन्होंने लगातार ६-७ झटके मारे और हम दोनो एक साथ आनन्द के शिखर तक
पहुँच गए।
भैया मेरे ऊपर ही पसर गए और हम दोनों ने एक दूसरे को अपनी बाहों में जकड़
लिया। कमरे में ए सी चल रहा था पर हम दोनों पसीने से लथपथ एक दूसरे से
लिपटे हुए किस कर रहे थे। थोड़ी देर बाद हम अलग हुए और स्नानघर में जाने
लगे तो देखा बिस्तर खून से भरा हुआ था। मैं घबरा गई और बोली," ये क्या ……
अब क्या होगा?"
भैया बोले," इसमें डर कुछ नहीं, पहले पहले यही होता है"
मेरी कमर में दर्द होने लगा था। हम दोनों बाथरूम में एक साथ नहाने गए तो
एक दूसरे को साबुन लगा कर नहलाया। मेरी चूत अब कुँवारी नहीं रही थी। भैया
ने रगड़ कर मेरी चूत को धोया और मैंने उनके लण्ड को, जिससे हम दोनों गर्म
हो गए। मैं थोड़ा शरमाई पर काफ़ी झिझक निकल चुकी थी। हम दोनों फ़व्वारे के
नीचे खड़े थे। भैया नीचे बैठे तो मैंने कहा,"ये क्या करने जा रहे हो जान
!"
"मैं तो अपने होठों की मुहर लगाने जा रहा हूँ …… और अब तुम भी लगाना"
वो मेरी चूत में उँगली करने लगे थे और जीभ भी फ़िराने लगे। मैं पागल हो
उठी। मैं अपने एक स्तन को मसलने लगी और भैया हाथ बढ़ा कर दूसरे को। भैया
मेरी हालत समझ गए और फ़र्श पर ही लिटा लिया। मेरी चूत में उनकी जीभ तैर
रही थी और मेरे हाथ उनके सर को पकड़ कर मेरी चूत को दबा रहे थे। मैं अपने
होठों को काट रही थी और लम्बी लम्बी सिसकारियाँ ले रही थी। मेरी टांगें
उनकी गरदन में लिपट गई थी।
फ़िर वो मेरे ऊपर आ गए और मैंने अपनी टांगें उनकी कमर पे लपेट ली। मेरे
दोनों हाथ उनकी गरदन में लिपट गए। उन्होंने फ़िर जोर का झटका मारा तो
आऽऽऽह्हऽऽआ …॥अ…अह्…… जैसे मेरी जान ही निकल गई। फ़िर भैया मेरे बूब्स को
दबाते और झटके मारते जाते। वो वहशी होते चले गए, मेरे बूब्स को निर्दयता
से मसल रहे थे और दांतों से काट रहे थे, मेरी गरदन पर भी प्यार से काटा।
वो जहाँ जहाँ अपने दाँत गड़ाते वहाँ खून सा जम जाता। मैं भी पागल हो जाती
तो बदले में अपने नाखून उनकी पीठ में गड़ा देती और उनकी गरदन पर काट लेती।
जंगलीपने से बाथरूम में मेरी प्यार भरी चीखें गूंज रही थी, जिससे भैया का
जोश बढ़ता ही जा रहा था। यह सिलसिला आधे घण्टे तक चला और उतनी देर में मैं
दो बार झड़ चुकी थी और भैया रुकने का नाम ही नहीं ले रहे थे। फ़िर जब हम
शांत हुए तो मैं तीसरी बार झड़ी थी। हम फ़्रेश हो कर कमरे में चले गए और
थोड़ा आराम करके खाना खाया। फ़िर हम नंगे ही एक दूसरे से लिपट कर बातें
करने लगे।
मैंने कहा,"भैया … ओह सोरी … जान, अब मेरा क्या होगा, मैं क्या करूँ और
अब आगे का क्या प्लान है, मेरा मतलब भविष्य का, क्योंकि अब मुझे घबराहट
हो रही है, मैं आपके बिना नहीं रह सकती।" वो बोले "चिंता मत करो जान । आज
हम नहीं सोयेंगे। आज हम एक दूसरे को पूरा सुख देंगे। आप मेरे साथ जी भर
कर और जम कर करो और अपनी बीवी को रौंद डालो जान." फिर भइया ने मुझे रात
में तीन बार और जम कर चोदा और वो भी आधे आधे घंटे तक। और तब तक मैं
बेहोशी की हालत में आ चुकी थी। हम दोनों नंगे ही चिपक कर सो गए।